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संगठन क्षमता की दक्षता को प्रतिबिम्बित करते हैं राव

नई दिल्ली। चाहे ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप हो चाहे सीमा और नक्सल क्षेत्र में जवानों पर प्राणघातक हमले या िफर अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा। मोदी सरकार जनादेश के अनुसार कार्य कर रही है। ऐसे ही तमाम ज्वल्ांत मुद्दों पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने बेवाक अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार चुनाव में बड़े सुधार की संभावनाओं पर काम कर रही है। ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पर हो रहे हमले पर भाजपा आयोग के साथ है। भविष्य में अगर कोई सकारात्मक सुझाव आता है, और वह सुझाव परिवर्तन की दृष्टि से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी हुआ तो विचार होगा
पी. मुरलीधर राव, विश्व के सबसे बड़े राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान में राष्ट्रीय महामंत्री हैं। इनकी इस राजनैतिक ऊंचाइयों के पीछे उनका पूरा जीवन संगठन के प्रति समर्पण व लगन, संगठन क्षमता की दक्षता को प्रतिबिम्बित करता है। राव देश की राजनीति की सत्ता की चमक-धमक की चकाचौंध के बीच से अपने आप कोे अलग रखकर अभी भी पार्टी के संगठन को धार देने में मशगूल रहने वाले ‘नींव के पत्थरों’ की तरह अडिग रहकर बोझ उठाने की क्षमता को और बढ़ाने में विश्वास रखने वाले, आत्मविश्वास से सराबोर भरे 54 वर्ष की आयु में अभी भी युवा नेता लगते हैं।
साक्षात्कार:
चुनाव में धन का प्रभाव कम कर पारदर्शिता लाना पार्टी का लक्ष्य: पी. मुरलीधर राव

आंध्र प्रदेश करीम नगर के साधारण किसान परिवार में जन्मे पी. मुरलीधर राव ने वारंगल व उस्मानिया विश्वविद्यालय से शिक्षा लेकर राजनैतिक जीवन के प्रारंभ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रूप में जुड़े और इसी दौरान आप पर नक्सली हमले भी हुए, किन्तु विचलित हुए बिना हौसले से आगे बढ़कर और सक्रिय होते चले गए नक्सली हमले के बाद परिवर्तित नाम से राजस्थान में संगठन का कार्य किया । फिर कश्मीर में अभा विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक संगठन मंत्री के रूप में प्रभावी कार्य किया। राव 29 वर्ष की अल्प आयु में स्वदेशी जागरण मंच में संगठन मंत्री के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाया। ऐसे कर्मठ भाजपा नेता राव से हिन्दी दैनिक नेश्ानल एक्सप्रेस के संस्थापक व संपादक विपिन गुप्ता ने देश के ज्वलंत मुद्दों पर लम्बी वार्ता की। उन्होंने सभी मुद्दों पर अपनी बेवाक टिप्पणी दी।

यहां प्रस्तुत हैं उनके साक्षात्कार के महत्वपूर्ण अंश …।

राजनीतिक सफर :
मुरलीधर राव एक भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी हैं। भाजपा में शामिल होने से पहले, राव स्वदेशी जागरण मंच में सक्रिय थे, जहां वह अपने आयोजन सचिव थे, साथ ही साथ हिंदू राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अन्य सहयोगियों में भी थे । मुरलीधर राव ने जनवरी 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजनाथ सिंह को संलग्नक के तौर पर भाजपा में शामिल किया था। 2010 में, उन्हें नितिन गडकरी द्वारा राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। 1 मार्च 2013 को बीजेपी के एक महासचिव नियुक्त किया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्री बनने के समय भी मुरलीधर राव भाजपा अध्यक्ष पद के लिए भी विवाद में थे।

प्रश्न :इन दिनों ईवीएम को लेकर तरह तरह  के सवाल उठाये जा रहे हैं इस पर आपकी क्या राय है ?
उत्तर :– ईवीएम के विषय में भारतीय जनता पार्टी इलेक्शन कमीशन के साथ है। हम सभी इस पर काम कर रहे हैं। लोगों का ईवीएम पर संदेह है, उस संदेह को दूर करना इलेक्शन कमीशन का पहला काम है। हमारे लिए निष्पक्ष इलेक्शन का होना बेहद महत्वपूर्ण और विश्वास का मापदंड है। ईवीएम के विषय पर बहुत सारे लोगों ने सवाल उठाया है जिस पर इलेक्शन कमीशन और हमारी सरकार मिलकर काम कर रही है। इस विषय में अगर कोई सकारात्मक सुझाव आता है, और वह सुझाव परिवर्तन की दृष्टि से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए हैं तो उसे मानना चाहिए।
यहां तक तो हम विषय और व्यवस्था के साथ हैं, लेकिन अगर विषय सुनियोजित होकर सरकार के ऊपर षड्यंत्र करते हुए चुनाव जीतने के लिए उपयोग किया गया, ऐसा आक्षेप लगाते हैं तो मेरा मानना है कि वह इस अभियान को कमजोर कर रहे हैं। जिस प्रकार का प्रचंड बहुमत आया है, लोगों को कहीं कोई संदेह ही नहीं आ रहा है कि किसी और को जिताना चाहते थे और भाजपा जीत गई। दिल्ली में भी जैसा भाजपा का माहौल था, उस माहौल में भारतीय जनता पार्टी जीत गई। विपक्ष इसमें भी धांधली का आरोप लगा रहा है लेकिन लोग मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में इस प्रकार का दिशा बदलने और गलत प्रचार करने, छोटे हरकतों करने से गंभीर मुद्दे कमजोर हो जाते हैं। चुनाव परिवर्तन और चुनाव में सुधार के विषय में पार्टी और दल से ऊपर उठकर व्यवस्था परिवर्तन के नाते जो भी कदम उठाने हैं। उस विषय में चुनाव आयोग के सामने हमें आगे बढ़ाना चाहिए। चुनावी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में आयोग की बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिसे देश के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि माननी चाहिए।
प्रश्न  :- इवीएम विवाद के बाद चुनाव सुधार के िलए सरकार कुछ नये कदम उठायेगी क्या? और चुनाव सुधार आयोग की रूकी हुई रिर्पोट के सुझाव लागू होंगे क्या ?
उत्तर :- 2019 या 2018 कह कर चुनाव सुधार की बात नहीं कर सकते। आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया को गतिमान बनाने के लिए, चुनाव आयोग को और ऑब्जेक्टिव बनाने के लिए जो भी कदम हैं उसमें सकारात्मक रूप से सोचने वाली सरकार सत्ता में है। और मैं मानता हूं कि परिवर्तन कमजोर सरकार के माध्यम से सामने नहीं आते। मजबूत     नेतृत्व और मजबूत सरकार रहते हुए ही किसी भी चीज में सुधार होता है। इसलिए यह बहुत ही अच्छा अवसर है। नेतृत्व जब पूर्ण रूप से विश्वास से लबालब हो तो जनता में भी विश्वास आता है। आने वाले समय में धन का प्रभाव चुनाव में कम करना चाहिए। लोकतंत्र में सबसे बड़ी सफलता तब होगी जब हम चुनाव में धन के प्रभाव को नियंत्रित कर सकेंगे। धन की व्यवस्था को पारदर्शितापूर्ण कर सकेंगे। अन्यथा यह कैप्टलिस्ट डेमोक्रेसी हो जाएगी। इसलिए भारतीय जनता पार्टी का यही मानना है और मेरा भी यही मानना है कि लोकतंत्र विकेंद्रित हो, इसमें जो भी कदम उठाना है उसमें यह मोदी जी की सरकार लिबरल रूप से सकारात्मक कदम उठाने के लिए तैयार है।
प्रश्न   :- राष्ट्रपति चुनाव आ रहा है, इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है। इसमें क्या ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं क्या कि सभी पार्टियां एकमत होकर किसी एक व्यक्ति को चुन लें जिससे चुनाव की स्थिति को टाला जा सके ?
उत्तर :- देखिये, इस देश में विपक्षी दल है वह जनता को और उसके जनादेश की कहीं ना कहीं अवहेलना और तिरस्कार करते हुए एक तरह से गलत दिशा में चर्चा करने में लगा हुआ है। जब वह भाजपा के सन्दर्भ में ऐसी चर्चा करते हैं तो भूल जाते हैं कि वह जनता की अवहेलना कर रहे हैं। वह आम सहमति के मुद्दों को  आम सहमति से भी नीचे ला रहे हैं। इस राष्ट्रीय अस्मिता को वह लोग मिजाटेरियम कह रहे हैं। वह भूल रहे हैं कि इस देश की मेजारिटी ने अन्य देशों के मेजारिटी जैसा व्यवहार कभी नहीं किया। इसलिए लन्दन में पढ़ी बात को भारत में बोलना प्रसांगिक नहीं है। भारत की मेजारिटी अपनी सांस्कृतिक पहलू लिए हुए है। यह सर्व पंथ के हिसाब से चलने वाली है। यह बहुजन सुखाय करने वाली नहीं, सर्वजन सुखाय कहने वाली है। इसलिए आम सहमति के खिलाफ जो लोग ऐसा कर रहे हैं उनकी मंशा आम सहमति बनाने की नहीं है। मोदी जी की सरकार इससे विचलित नहीं होने वाली है। सबका विकास, सबका साथ की दृष्टि से सरकार को चलनी चाहिए। व्यक्ति स्वीकार्य होना चाहिए, दल स्वीकार्य होने से व्यक्ति स्वीकार नहीं होना चाहिए। सामाजिक रूप से मोदी की जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्रपति पद के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को सामने लाने का पहल करें जो देशहित में सोच सके। वह व्यक्ति दलों से समझौता करके काम करने नहीं लोकहित, जनहित में कार्य करने वाला होना चाहिए। सरकार का नेतृत्व करने वाले नेता के नाते यह जिम्मेदारी पीएम मोदी पर रहेगी।
प्रश्न   :- उत्तर भारत में जो चुनावी पृष्ठभूमि तैयार की है क्या उसी तरह आप दक्षिण भारत में भी तैयार करना चाहते हैं ? क्योंकि वहीं से आपकी पढाई लिखाई हुई, आपका वहां के विद्यार्थी परिषद् से गहरा सम्बन्ध रहा है।
उत्तर :- दक्षिण भारत की पूरी राजनीति तीन साल से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। तमिलनाडु में 1967 से लेकर आजतक सत्ता और विपक्ष दोनों ही रीजनल पार्टी है। आज नेतृत्व के मसले पर सरकार की अस्थिरता भी एक समस्या है। ऐसे में सम्पूर्ण तमिलनाडु में आज भ्र्ष्टाचार जैसे मुद्दे पर सरकार बन रही है। भाजपा इसे एक बहुत बड़ा अवसर मानती है। नरेंद्र मोदी की सरकार जैसे केंद्र में है वैसे ही वहां पर है। भाजपा में लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है, अन्य पार्टियों के नेता भी इसमें आना चाहते हैं। इसलिए सिर्फ परिवर्तन नहीं पूरा राजनीतिक परिवेश बदल रहा है। केरल में भी पुरानी राजनीति नहीं चलने वाली है। भाजपा की स्थिति मजबूत हो रही है और कम्युनिस्ट सरकारें धीरे- धीरे संकुचित हो रही हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की पहचान सुशासन नहीं, हिंसा के रूप में हुई है। जहां मुख्यमंत्री है, जहां सरकार का केंद्र है वहां भी हिंसा है। कर्नाटक में हम सदैव मजबूत स्थिति में रहे हैं, पिछले दस सालों में अब कांग्रेस की वही स्थिति है जो देश के अन्य हिस्सों में है। भ्रष्टाचार से दूर नहीं हो पाते, लॉ एंड आर्डर उनके हाथ में होती नहीं है, इस तरह की बहुत सारी परेशानियां वहां है। यदुरप्पा के नेतृत्व में हमारी पार्टी बहुत ही अच्छा कार्य कर रही है। तेलंगाना में अगर देखें तो विपक्ष की भूमिका कांग्रेस निभा नहीं पा रही है। टीआरएस बिलकुल कांग्रेस जैसा ही है, तो ऐसे में भाजपा जैसी स्थिति किसी की भी नहीं है। दक्षिण भारत में इसलिए 20-30 साल की जो राजनीति है वह परिवर्तन की दृष्टि से गुजर रही है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी की संभावनाएं प्रबल हैं।
प्रश्न  :- सबसे बड़ा मुद्दा, पाकिस्तान का मुद्दा, अभी जो पूरे देश का मुद्दा है उसमें कोई तात्कालिक प्रक्रिया की अपेक्षा रहती है। यह बड़ा मुद्दा है और सरकार से किसी भी प्रकार की कार्रवाई को लेकर आपकी क्या राय है ?
उत्तर :-  देखिये, देश का विभाजन जिसने स्वीकार किया उस पर पाकिस्तान की समस्या की जिम्मेदारी है। क्योंकि जिस दिन पाकिस्तान बना उसी दिन से तय है कि लम्बे समय तक हमने अपना एक दुश्मन देश बना लिया। यह कोई आज की समस्या या फिर किसी और के नीतियों के कारण दुश्मन बना ऐसा नहीं है। पाकिस्तान का अस्तित्व, पाकिस्तान की सत्ता, यह सब भारत विरोधी हैं। पाकिस्तान की जनता कोई जरुरी नहीं की भारत विरोधी हो। लेकिन व्यवस्थाएं भारत विरोधी हैं। ऐसे में भी भारत 1947 से लेकर आजतक दोस्ती करना चाहता है, उसकी अस्मिता, उसके अस्तित्व को स्वीकार करते हुए पर वह तैयार नहीं होते। बहुत प्रयास हुए, बहुत पहल हुई, पर कोई फर्क नहीं पड़ा। ऐसे में हमारा व्यवहार नहीं बदलना चाहिए क्या ? हमें सजग भीं नहीं रहना चाहिए ? पाकिस्तान की जो सत्ता है उसमें लोकतंत्र भी है, सेना भी है। ऐसे में अगर आप किसी एक की बात करेंगे तो त्वरित फल मिल जायेगा लेकिन किसी दूसरे ने हस्तक्षेप कर दिया तो उस पर अमल नहीं हो पायेगा। कश्मीर के सन्दर्भ में दूरगामी नीति की बात करें तो वहां की सरकार यतार्थ से दूर रहना चाहती है। जो संभव नहीं है वह करना चाहती है, बोलना चाहती है, बोलते हुए दिखना है तो लड़ाइयां आगे बढ़ती हैं। वहां पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पकिस्तान अलग-अलग तंत्रों के माध्यम से अपना सहयोग जारी रखे हुए है। वह किसी के भी नियंत्रण में नहीं है, विश्व सत्ता के किसी नियंत्रण में नहीं है। सभी तरह की तैयारियों के साथ यह लड़ाई रहेगी और यह लड़ाई दीर्घकालिक है। छह महीने में यह खत्म हो जाएगी ऐसा मानना नहीं चाहिए। लेकिन इस लड़ाई में थकावट भी नहीं आनी चाहिए। अपने संकल्पों के साथ, पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ती रहनी चाहिए।
प्रश्न  :- पाक सीमा हो या नक्सली क्षेत्र, यहां जवानों की शहादत को लेकर जनता में जो आक्रोश है, उसके सम्बन्ध में आप क्या कहना चाहेंगे ?
उत्तर :-  इसके लिए सही नीति और सही दिशा का होना बहुत जरूरी है। पहली बार आम जनता के बीच इस सरकार को लेकर विश्वास है कि यहां के जवानों के साथ खड़ी होने वाली सरकार है, शहीदों के साथ खड़ी होने वाली सरकार है, मर रहे लोग, मिट रहे लोग के साथ मरने मिटने वाली सरकार है, उनके बलिदान को बेकार नहीं जाने देने वाली सरकार है। सम्पूर्ण देश की जनता को एक साथ जोड़ने वाली सरकार है, जिसका हम नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रश्न :- आप भाजपा व संगठन से वर्षों से जुड़े हुए हैं। संगठन को आपने जमीनी स्तर पर खड़ा किया है। अभी जो बाहरी लोग पार्टी में आकर टिकट ले जाते हैं, मंत्री बन जाते हैं, इससे पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं में आक्रोश  है। उसके सम्बन्ध में आप क्या कहना चाहते हैं ?
उत्तर:- भारतीय जनता पार्टी का विस्तार बहुत ही तेजी से हो रहा है। चुनावों में जो सफलता मिली उससे लोगों का आकर्षण, युवाओं सहित हर वर्ग में बढ़ा है भाजपा एक सीमित दायरे वाली पार्टी से सम्पूर्ण समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी बन गई, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित है। लोकतंत्र के लिए ऐसी पार्टी का उदय देश के हित में है। कांग्रेस का जिस तरह से पतन हुआ। उसके बाद सम्पूर्ण देश में लोकतंत्रीय व्यवस्था में देश की एकता के लिए भाजपा कार्यकर्ता सक्रिय रहे जिससे लोगों का आकर्षण बढ़ा। वह कार्यकर्ता  के रूप में बदल रहा है। हमारी पार्टी जब सत्ता में नहीं थी उस समय जो कार्यकर्ताओं की पहचान और पावर बढ़ी उससे संभावनाएं बढ़ी हैं। अवसर बड़े हुए हैं इसलिए कोई असंतुष्टि लम्बे समय तक रहने की संभावना नहीं है। क्योंकि सबको अवसर मिलने वाली पार्टी है। कोई कहीं से भी आये यहां कार्यकर्ता और सिद्धांत आधारित ही चलेगा। नेतृत्व का आदेश सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता उसका पालन करते है। पार्टी का यही अनुशासन सबसे खास है। इसलिए भाजपा विस्तृत कार्यकर्ता प्रशिक्षण देने का अभियान हमने चलाया है। अभी तक हम सबने दस लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है। और आगे कार्यकर्ताओं को ही मंच मिलेगा।
प्रश्न :- गोविंदाचार्य के बारे में अक्सर कहा जाता है कि सक्रिय  राजनीति में आये लेकिन वह हमेशा पर्दे के पीछे क्यों रहते हैं ? गोविंदाचार्य पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं‍,उनके बारे में क्या राय है।
 उत्तर :-  देखिये, हर व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत निर्णय लेने का अधिकार होता है। इस पार्टी में जब हम बहुत अच्छी स्थिति में रहे उस समय नानाजी ने कहा की हम साठ साल की उम्र में संन्यास लेंगे। पार्टी सत्ता में थी, उनको मंत्री बनाने की बात चल रही थी। उन्होंने ऐसा किया और लोगों को कहा भी लेकिन किसी ने ऐसा किया क्या ? लेकिन उन्होंने खुद ऐसा कर लिया। लेकिन उनका निर्णय सम्मानदायक और लोगों को प्रेरणा देने वाला है। उनका जीवन पार्टी से ऊपर उठकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए ज्यादा रहा। उन्होंने देशहित में तमाम रचनात्मक कार्य किये इसलिए गोविंदाचार्य जो काम कर रहे हैं वह देश के लिए है और देशहित में है। इसलिए राजनीति में आना और नहीं आना सुझाव किसी का भी हो निर्णय उनका अपना है।
प्रश्न  :- 1992 से  अभी तक रामलला टेंट में हैं। अयोध्या  में राममंदिर बनने की संभावना पर आपका क्या   कहना  है ?
उत्तर :- देखिये, राम मंदिर इस देश की आस्था का विषय है, अस्मिता का विषय है , इसमें कुछ भी किन्तु-परन्तु नहीं है ,उत्तर भारत को दक्षिण भारत के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। हमारा मानना है की मजहब के आधार पर भी नहीं देखा जा सकता है। इसमें हमारी पार्टी ने घोषित तौर पर कहा है कि वहां राम मंदिर बनना चाहिए। जो देश के लिए बहुत आवश्यक है। वह काम होना चाहिए और हमारी सरकार उत्तर प्रदेश में भी है। हमें यह बात ध्यान रखना है कि सम्पूर्ण देश की जनता बड़ी आस्था के साथ हमारी पार्टी के साथ है और हमारे कामों को देख रही है। पार्टी सभी स्थितियों पर ध्यान दे रही है कि इस प्रकरण में कोर्ट के हिसाब से क्या होना है, समाज के दोनों पक्षों के माध्यम से क्या हो सकता है और उसमें सभी लोग खुले मन से क्या कर सकते हैं। यूपी और केंद्र सरकारें राम मंदिर पर गंभीरता से सोच रही है।
प्रश्न :- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाहर बैठकर दोनों पक्ष   इस मुद्दे को सुलझा लें? इस पर आपकी क्या  प्रतिक्रिया है ?
उत्तर :- इसमें सरकार की भी एक पहल हो सकती है ? इस विषय में मूल जो दो पक्ष है इसमें दो पक्षों में विश्वास पैदा करके ही समस्या का समाधान निकलेगा और भारतीय जनता पार्टी अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएगी।
प्रश्न   :- 2019 के चुनाव से पूर्व मंदिर निर्माण की क्या     संभावना है?
उत्तर :- राजनीति में भविष्यवाणी नहीं करना चाहिए। हम चाहते हैं कि समस्या का समाधान हो, लेकिन दोनों पक्षों के राय पर ही हो ऐसा हम चाहते हैं। हमारी पार्टी भी चाहती है कि जितनी जल्दी हो भव्य मंदिर बने और विवाद का अंत हो।

http://www.nationalexpress.co.in/2017/05/14/interview-murlidhar-rao/